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प्रदोष व्रत को करने से क्या फल मिलता है और जानिए प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2018)

pradosh vrat 2018

प्रदोष व्रत में विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत प्रदोष काल में हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। सूर्यास्त के बाद सांयकाल या जिसे तीसरा पहर भी कहते है, प्रदोष काल कहलाता है। हर एक वर्ष में 24 प्रदोष व्रत आते है। जबकि हर तीसरे साल एक अधिक मास आता है तो उस साल में 26 प्रदोष व्रत होते हैं।

प्रदोष व्रत को करने का फल

अलग-अलग दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत की महिमा अलग-अलग होती है। हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इसी वजह से प्रदोष व्रत किसी भी दिन पड़ सकता है इसलिए दिनों के हिसाब से प्रदोष व्रत के नियम और महत्व का पता होना चाहिए तभी किये गये व्रत से लाभ की भी प्राप्ति होती है।

प्रदोष व्रत दिन रविवार

रविवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को भानुप्रदोष या रवि प्रदोष कहते हैं। इस दिन नियम पूर्वक व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति और लंबी आयु प्राप्त होती है। रवि प्रदोष का संबंध सीधा सूर्य से होता है। अत: चंद्रमा के साथ सूर्य भी आपके जीवन में सक्रिय रहता है। यह सूर्य से संबंधित होने के कारण नाम, यश और सम्मान भी दिलाता है। अगर आपकी कुंडली में अपयश के योग हो तो यह प्रदोष करें। रवि प्रदोष रखने से सूर्य संबंधी सभी परेशानियां दूर हो जाती है।

bhagvan shiv mata parvati

प्रदोष व्रत दिन सोमवार

सोमवार को त्रयोदशी तिथि के दिन पड़ने वाले प्रदोष को सोम प्रदोष कहते हैं। यह व्रत रखने से इच्छा अनुसार फल प्राप्ति होती है। जिसका चंद्र खराब असर दे रहा है उनको तो यह प्रदोष जरूर नियम ‍पूर्वक रखना चाहिए जिससे जीवन में शांति बनी रहेगी। अक्सर लोग संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखते हैं।

प्रदोष व्रत दिन मंगलवार

मंगलवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं। इस दिन स्वास्थ्य सबंधी तरह की समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दिन प्रदोष व्रत विधिपूर्वक रखने से कर्ज से छुटकारा मिल जाता है।

प्रदोष व्रत दिन बुधवार

बुधवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को सौम्यवारा प्रदोष भी कहा जाता है यह शिक्षा एवं ज्ञान प्राप्ति के लिए किया जाता है। साथ ही यह जिस भी तरह की मनोकामना लेकर किया जाए उसे भी पूर्ण करता है। यदि आपमें ईष्‍ट प्राप्ति की इच्‍छा है तो यह प्रदोष जरूर रखें।

प्रदोष व्रत दिन गुरुवार

गुरुवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को गुरुवारा प्रदोष कहते हैं। इससे आपक बृहस्पति ग्रह शुभ प्रभाव तो देता ही है साथ ही इसे करने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। अक्सर यह प्रदोष शत्रु एवं खतरों के विनाश के लिए किया जाता है। यह हर तर की सफलता के लिए भी रखा जाता है।

प्रदोष व्रत दिन शुक्रवार

शुक्रवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को भ्रुगुवारा प्रदोष कहा जाता है। जीवन में सौभाग्य की वृद्धि हेतु यह प्रदोष किया जाता है। सौभाग्य है तो धन और संपदा स्वत: ही मिल जाती है। इससे जीवन में हर कार्य में सफलता भी मिलती है।

प्रदोष व्रत दिन शनिवार

शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को कहा जाता है। शनि प्रदोष से पुत्र की प्राप्ति होती है। अक्सर लोग इसे हर तरह की मनोकामना के लिए और नौकरी में पदोन्नति की प्राप्ति के लिए करते हैं।

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