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रुद्राक्ष को कब धारण करना चाहिए और कोन सा रुद्राक्ष किसका स्वरूप है

रुद्राक्ष दो शब्दों से मिलकर बना है – रूद्र और अक्ष । रुद्राक्ष को सबसे पवित्र और साकारात्मक उर्जा देने वाला नग माना जाता है । प्राचीन ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव शंकर के आश्रुओं से रुद्राक्ष उत्पन्न हुआ था । रुद्राक्ष का प्रयोग प्राचीन काल से आभूषण के रूप में, सुरक्षा के लिए और ग्रह शांति के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। रुद्राक्ष से सभी प्रकार की समस्या का समाधान हो जाता है और यह स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखता है।

Rudraksha Mala
Patrika

रुद्राक्ष धारण करने के पहले इस बात का ध्यान सदेव रखना चाहिए की रुद्राक्ष को सबसे पहले भगवान शिव को समर्पित करना चाहिए। रुद्राक्ष को सावन में, सोमवार को, सूर्य ग्रहण, चन्द्र ग्रहण और शिव रात्रि के दिनों में धारण करने से मिलता है शुभ फल।

रुद्राक्ष और उनका महत्व (Rudraksh and its Benefits)

  1. एक मुखी रुद्राक्ष – एक मुखी रुद्राक्ष को साक्षात भगवान शिव का स्वरुप माना जाता है। एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से जिनकी कुंडली में सूर्य ग्रह से कोई भी दोष उत्पन्न हो रहा होता है वः समाप्त हो जाता है। सिंह राशी वालों के लिए यह अत्यंत शुभ होता है ।
  2. दो मुखी रुद्राक्ष – दो मुखी रुद्राक्ष को अर्धनारीश्वर स्वरुप माना जाता है। जिन व्यक्तियों के परिवार और वैवाहिक जीवन में समस्या हो या चन्द्रमा कमजोर हो उनको दो मुखी रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत लाभकारी होता है। कर्क राशी वालो के लिए भी अत्यंत उत्तम परिणाम देता है।
  3. तीन मुखी रुद्राक्ष – तीन मुखी रुद्राक्ष अग्नि और तेज का स्वरुप होता है। मंगल दोष के निवारण के लिए इसी रुद्राक्ष का प्रयोग किया जाता है। मेष राशी और वृश्चिक राशी के लोगों के लिए यह उत्तम परिणाम देता है।
  4. चार मुखी रुद्राक्ष – चार मुखी रुद्राक्ष ब्रह्मा का स्वरुप माना जाता है। जिस भी व्यक्ति को त्वचा के रोगों और वाणी की समस्या होती है उसको यह रुद्राक्ष धारण करने से विशेष लाभ होता है। मिथुन और कन्या राशी वालो के लिए सर्वोत्तम।
  5. पांच मुखी रुद्राक्ष – पांच मुखी रुद्राक्ष को कालाग्नि भी कहा जाता है। इसको धारण करने से मंत्र शक्ति तथा अदभुत ज्ञान प्राप्त होता है जिनकी राशी धनु या मीन हो या जिनको शिक्षा में लगातार बाधाएँ आ रही हों ,ऐसे लोगों को पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
  6. छः मुखी रुद्राक्ष – छः मुखी रुद्राक्ष को भगवान कार्तिकेय का स्वरुप माना जाता है। अगर कुंडली में शुक्र कमजोर हो तो छः मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ होता है। इसको धारण करने से व्यक्ति को आर्थिक और व्यवसायिक लाभ होता है।
  7. सात मुखी रुद्राक्ष – सात मुखी रुद्राक्ष को सप्तमातृका तथा सप्तऋषियों का स्वरुप माना जाता है। अगर मृत्युतुल्य कष्टों का योग हो अथवा मकर या कुम्भ राशी हो तो यह अत्यंत लाभ देता है।
  8. आठ मुखी रुद्राक्ष – आठ मुखी रुद्राक्ष को अष्टदेवियों का स्वरुप माना जाता है तथा इसको धारण करने से अष्टसिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। इसको धारण करने से किसी भी प्रकार के तंत्र मंत्र का असर नहीं होता। राहु से सम्बन्धी समस्याएँ हों तो ऐसे लोगो को इसे धारण करने से विशेष लाभ होता है।
  9. ग्यारह मुखी रुद्राक्ष – ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को एकादश मुखी रुद्राक्ष स्वयं शिव का स्वरुप माना जाता है। संतान सम्बन्धी समस्याओं के निवारण के लिए तथा संतान प्राप्ति के लिए इसको धारण करना शुभ होता है।

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