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क्या होता है रुद्राक्ष ?

Rudraksh

रुद्राक्ष शब्द की उत्पत्ति रुद्र और अक्ष से हुई है। ‘रुद्र’ स्वयं भगवान शिव को दर्शाता है क्योंकि यह शिव का दूसरा नाम भी है, जबकि ‘अक्ष’ का शाब्दिक अर्थ आंसू है।

रुद्राक्ष की कथा – Rudraksh ki Katha

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ऐसा कहा जाता है कि एक बार भगवन शिव सभी जीवित प्राणियों के जीवन में खुशी लाने के उद्देश्य से गहरे ध्यान में गए। और जब वह अपने गहरे ध्यान से जागे तो उनके कुछ आँसू पृथ्वी पर गिर गए। इन आसुओ ने बीज की तरह काम किया और यह रुद्राक्ष के पेड़ में बदल गए। इसलिए रुद्राक्ष का अर्थ है “भगवान शिव के आंसू” और वृक्ष के बीज का प्रयोग पूजा के साथ-साथ अन्य लाभों के लिए भी किया जाता है।

रुद्राक्ष का धार्मिक महत्व – Rudraksh ka Mahtav

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जब भी हम शिव के चित्र या वर्णन को देखते हैं, तो हम उन्हें अपने सिर, बाहों और हाथों में रुद्राक्ष पहने हुए देखते हैं। इसी प्रकार शिव के भक्तो ने भी भगवान् को प्रसन करने के लिए रुद्राक्ष को धारण करना शुरू कर दिया। कुछ लोगों का मानना ​​है कि रुद्राक्ष में ब्रह्मांड के पूरे विकास का रहस्य शामिल है। लेकिन, ज्यादातर लोग इसे शांतिपूर्ण जीवन और गहन ध्यान के लिए पहनते हैं। ऐसा कहा जाता है रुद्राक्ष को धारण करने से अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति, मार्ग में सफलता और निडर जीवन जीने में सहायता मिलती है। रुद्राक्ष पहनने वाले को स्वयं भगवान् शिव के दुवारा संरक्षण प्राप्त होता है।

रुद्राक्ष कहा पाया जाता है ?

रुद्राक्ष का अंग्रेजी में नाम ‘Utrasum Bead Tree’ है। यह ज्यादातर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है, खासकर इंडोनेशिया और नेपाल ( भारत और मलेशिया के कुछ क्षेत्रों) में पाया जाता है। इसका पेड़ लगभग 15 से 60 मीटर ऊंचा होता है और लगभग सात वर्षों तक बीज को संभाले रखता है। दुनिया भर में इंडोनेशिया में 70% नेपाल में 25% पेड़ और शेष देशों में 5% रुद्राक्ष के पेड़ पाए जाते हैं।

ब्लूबेरी – Blueberry

blueberry-rudraksh

रुद्राक्ष मोती को ब्लूबेरी मोती भी कहा जाता है। क्योंकि यह वो बीज होते हैं जो रुद्राक्ष के फलों में से निकलते हैं, और इसके मोती पूरी तरह से पकने तक नीले रंग के बाहरी खोल से सुरक्षित होते हैं। उन्हें काफी दिनों के लिए पानी में रखा जाता है और फिर इन्हे छिलने के बाद खोल से बाहर निकाला जाता है। इन फलों का गुद्दा भी विभिन्न बीमारियों को ठीक करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

यह मानव जाति के लिए भगवान का उपहार है और इसे मनुष्य और भगवान के बीच एक पुल माना जाता है। इसका उपयोग उच्च आत्म ज्ञान प्राप्त करने के लिए किया जाता है। दुनिया भर में 1 मुखी रुद्राक्षों से लेकर 21 मुखी रुद्राक्षों तक रुद्राक्ष पाए जाते हैं। जीवन में सफलता और संतुष्टी प्राप्त करने के लिए रुद्राक्ष धारण करने का सुझाव दिया जाता है। ग्रहों के बुरे प्रभावो को खत्म करने के लिए भी लोग रुद्राक्ष पहनते हैं।

हिन्दू धर्म में रुद्राक्ष को सबसे अधिक शक्तिशाली और सौभाग्यशाली माना जाता है।

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