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जानिये संसार की सबसे बड़ी कला कोन सी है

SANSAAR KI SBSE BADI KALA

हमारे हिन्दू ग्रंथों के अनुसार 84 लाख योनियों में भटकने के बाद मानव जन्म मिलता है और इसीलिए मानव योनी को संसार की सबसे बड़ी या शुभ कर्मों के द्वारा प्राप्त की गई योनी भी काहा जाता है। मानव जन्म बड़े ही पुण्यों के बाद मिलता है मानव ईश्वर के द्वारा रची गई सबसे उत्तम और सबसे प्रभावशाली रचना है। मानव संसार के सभी अन्य जीवो से भिन्न है क्योकि वे अपना और दूसरों का अच्छा बुरा सोच विचार कर सकते है और सही निर्णय ले सकते है।

SANSAAR KI SBSE BADI KALA

जीवन में सभी मनुष्य अपनी अपनी इच्छा और क्षमता के अनुसार कर्म करते है किन्तु सभी मनुष्यों के पास अपनी अपनी कोई न कोई कला अवश्य होती है। ईश्वर ने सभी को कोई न कोई कला या गुण अवश्य दिया है क्योकि बिना कला या गुण के सभी कुछ नीरस है या यूँ कहे की इनके बिना कुछ भी संभव ही नही है।

संसार में सभी के पास कोई न कोई कला जरुर है जैसे किसी के पास चित्र बनाने की कला चित्र बनाकर एक अच्छा और मनमोहक चित्र बनाकर चित्रकार सबको अपने चित्र की तरफ मोहित करता है। तो किसी के पास युद्ध कला होती है जिससे वह किसी भी युद्ध में विजय प्राप्त कर सकता है। तो किसी के पास भवन निर्माण करने की कला होती है जिससे वह बहुत सुंदर और भव्य भवनों का निर्माण कर सकता है। तो किसी के पास संगीत की कला होती है तो किसी के पास निर्त्य कला होती है। इसी तरह से सभी के पास भिन्न भिन्न कला और भिन्न भिन्न सोच होती है।

sbse badi kala

किन्तु एक कला जो संसार में उस मनुष्य को सबसे अलग बनती है और वह है मन को भी प्रभावित करने का कला या गुण। तो सबसे बड़ी कला वो होती है जो सबको प्रभावित करती है और सबसे बड़ा कलाकार वो होता है जो सबके मन में प्रवेश करे। जिसके पास ये कला होगी केवल वही इस संसार में सबसे उत्तम होगा इस संसार में सब कुछ उसी के अधीन होगा जो प्रेम से सबको अपना बनाएगा और सबके साथ प्रेम से ही रहेगा।

सभी की अपनी अपनी कलाओं के अनुसार अपने अपने दायित्व भी होते है और अपने अपने कर्तव्यों के अनुसार ही सभी कार्य भी करते है। इसलिए कभी भी किसी की कला का अपमान नही करना चाहिए और न ही किसी को अपने से नीचे या अपने से छोटा समझना चाहिए। किसी की भी तुलना अपने से या अपनी तुलना दुसरे से नही करनी चाहिए केवल अपनी क्षमताओं को निखारते रहना चाहिए और सही समय का इन्तेजार करना चाहिए क्योकि जब सही समय आता है न वह पुराने हर प्रकार के गम को भुला देता है और देता है तो केवल शुभ फल।

KALA

क्या किसी और की कला को सिखा जा सकता है

जी हाँ यदि मनुष्य चाहे तो क्या कुछ नही कर सकता ईश्वर ने उसको भिन्न भिन्न प्रकार की अलोकिक शक्तियों से सुसज्जित किया है किसी भी प्रकार की कला को आसानी से सीखा भी जा सकता है केवल जरूरत है तो उसको ध्यान से सिखने की और इस प्रक्रिया में अपना सम्पूर्ण योगदान देने की कला को सिखने के दौरान बहुत सारी मुसीबतों का सामना भी करना पड़ सकता है। किन्तु उनसे घबराना नही है बल्कि साहसी बनकर उनका मुकाबला करते हुए उस कला में माहिर होना है।

मन में साहस बनाकर चलते हुए असफलता के भय को दूर भागते हुए अपने लक्ष्य तक पहुचने वाला ही सबसे महान और सबसे बड़ा कलाकार साबित होता है बस अपने मन को एकाग्र करते हुए अपने लक्ष्य की और हर पल बढ़ते रहे।

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