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सफला एकादशी पर कैसे करें पूजन और कोन से काम इस दिन ना करें

पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी मनाई जाती है। सफला एकादशी पर व्रत करने से मनुष्य के जीवन में सफलता के सभी द्वार खुल जाते है। यह व्रत सफलता देने वाला माना गया है। इस दिन सच्‍चे मन से पूजन करने पर भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। सफला एकादशी का यह व्रत 1 जनवरी 2018 को है।

saphala ekadashi

सफला एकादशी पर पूजन कैसे करें

सफला एकादशी पर सुबह सबसे पहले स्नान आदि करके भगवान विष्णु का पूजन करें। इस दिन सफेद चन्दन का प्रयोग करना अत्यंत लाभकारी होता है। पूजा में श्री हरि को पंचामृत, पुष्प और फल अर्पित करने चाहिए। यदि संभव हो सके तो उपवास रखना चाहिए और शाम को दीपदान करने के बाद सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए। गरीबो और जरुरतमंदो को वस्त्र और अन्न का दान करना भी विशेष शुभकरी होता है।

सफला एकादशी पर धन का वरदान पाने के लिए लक्ष्मी जी के साथ श्री हरि की पूजा करें। मां लक्ष्मी को सौंफ और श्री हरि को मिसरी अर्पित करें और “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः” का 108 बार जाप करें। पूजा के बाद सौंफ और मिसरी को एक साथ रख लें और इसे रोजाना सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

सफला एकादशी पर क्या नही करना चाहिए

सफला एकादशी पर यदि पुरे दिन स्वच्छ रहकर व्रत आदि किया हो तो रात्री में भी बिस्तर पर नहीं, जमीन पर सोना चाहिए और किसी भी प्रकार की नशीली वस्तुओं, मांस और मदिरा का सेवन भूलकर भी ना करें। एकादशी के दिन लहसुन, प्याज का सेवन करना भी वर्जित है। वहीं सफला एकादशी की सुबह दातुन करना भी वर्जित माना गया है। इस दिन किसी पेड़ या पौधे की फूल-पत्ती तोड़ना भी अशुभ माना जाता है।

सफला एकादशी की व्रत कथा

एक पुराणिक कथा के अनुसार महिष्मान नाम के राजा के चार पुत्र थे। राजा का सबसे बड़ा पुत्र जिसका नाम लुम्पक था वह बहुत पाप करता था और जब राजा को इस बात का पता चला तो उन्होंने लुम्पक को अपने राज्य से निकाल दिया। लेकिन लुम्‍पक पर इसका कोई भी प्रभाव नही पड़ा और उसने अपने पिता की नगरी में चोरी करने की ठान ली। वो दिन में राज्य से बाहर रहता था और रात में जाकर चोरी करता था।

इससे राज्य के लोग भी परेशान हो चुके थे और उसके पापों के बारे में सुनकर राजा को भी अत्यंत दुःख पहुंचा। अब वो लोगों को नुकसान भी पहुंचाने लगा था। वह एक वन में एक पीपल के पेड़ के निचे रहता था। पौष माह की दशम तिथि के दिन वो ठंड से बेहोश हो गया। अगले दिन जब उसे होश आया तो कमजोरी के कारण वो कुछ भी नहीं खा पाया और आस पास मिले फल उसने पीपल की जड़ में रख दिए। इस तरह से अनजाने में उससे एकादशी का व्रत पूरा हो गया।

एकादशी के व्रत से भगवान श्री हरी उससे प्रसन्न हो गये और उसके सभी पाप माफ कर दिए। इससे उसकी बुद्धि ठीक हो गई और उसने सभी बुरे काम छोड़ दिए और ऐसा पता चलने के बाद राजा भी उसको वापस अपना लेते हैं।

यह भी पढ़े: सफला एकादशी व्रत  का महत्व

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