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नवदुर्गा प्रथम माता शैलपुत्री – माँ दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा

देवी दुर्गा ने हिमालय के यहाँ पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसी कारण से उनका नाम शैलपुत्री (shailputri devi) पड़ा। नवरात्रि पर पूजा जाने वाला यह देवी दुर्गा का प्रथम रूप है। इनका वाहन वृषभ है, और इन्हें वृषारूढ़ा के नाम से भी जाना जाता है। यह देवी सती का दूसरा जन्म है जो एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे हाथ में कमल धारण किए हुए हैं

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नवरात्रि तारीख (Navratri 2018 date) किस दिन होगी कौन सी देवी स्वरूप की आराधना

Contents

प्रथम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता शैलपुत्री

द्वितीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता ब्रह्मचारिणी

तृतीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता चंद्रघंटा

चतुर्थी नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कूष्मांडा

पंचम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता स्कंदमाता

षष्ठी नवरात्र पर नवदुर्गा – देवी कात्यायनी

सप्तम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कालरात्रि

अष्टम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता महागौरी

नवम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता सिद्धिदात्री

10 अक्टूबर, 2018 को नवरात्र का पहला दिन है और इस दिन देवी शैलपुत्री की आराधना की जाती है।

देवी शैलपुत्री (shailputri devi) की कहानी कुछ इस प्रकार से है

जब प्रजापति दक्ष द्वारा यज्ञ का आयोजन किया गया तो उन्होंने भगवान शंकर को छोड़कर सभी देवताओं को यज्ञ में निमंत्रित किया। देवी सती इस बात को साधारण सा समझ कर यज्ञ में जाने के लिए विकल हो उठी, परंतु भगवान शंकर ने इसे उचित ना समझा। देवी सती के बार बार आग्रह करने पर भगवान शंकर ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। जब देवी अपने घर पहुंची तो वहां उनकी बहनों ने उनके साथ ठीक व्यवहार ना करते हुए उनका उपहास किया। सिर्फ उनकी माता ही थी जो उन्हें स्नेह दे रही थी। जब प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान शिव के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया तो यह देखकर देवी सती को बहुत गहरा दुख पहुंचा।

अपने पति का अपमान देवी सती से सहन न हो सका। इसी कारण से उन्होंने खुद को योगाग्नि में जला कर भस्म कर लिया। इस दारुण दुःख से भगवान शंकर बहुत क्रोधित हो उठे और उन्होंने यज्ञ का विध्वंस कर दिया।

इन्हीं देवी सती ने शैलराज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाई। इन्हें देवी पार्वती या हेमवती के नाम से भी जाना जाता है। जिन्होंने आगे जाकर भगवान शंकर से विवाह किया। देवी शैलपुत्री की शक्ति अनंत है। मां शैलपुत्री की आराधना से मनोवांछित फल और कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

मां शैलपुत्री जी की आरती –

शैलपुत्री मां बैल असवार । करें देवता जय जय कार ।।

शिव-शंकर की प्रिय भवानी । तेरी महिमा किसी ने न जानी ।।

पार्वती तूं उमा कहलावे । जो तुझे सुमिरे सो सुख पावें ।।

रिद्धि सिद्धि परवान करे तू । दया करे धनवान करे तू ।।

सोमवार को शिव संग प्यारी । आरती जिसने तेरी उतारी ।।

उसकी सगरी आस पुजा दो । सगरे दुःख तकलीफ मिटा दो ।।

घी का सुंदर दीप जला के । गोला गरी का भोग लगा के ।।

श्रद्धा भाव से मंत्र जपायें । प्रेम सहित फिर शीश झुकायें ।।

जय गिरराज किशोरी अम्बे । शिव मुख चन्द्र चकोरी अम्बे ।।

मनोकामना पूर्ण कर दो । चमन सदा सुख संम्पति भर दो ।।

मां शैलपुत्री पूजा मंत्र –

प्रथम दुर्गा भवसागर: तारणीम। धन ऐश्वर्य दायिनीशैलपुत्री प्रणामाभ्यम। त्रिलोजननी त्वहिं परमांनद प्रदीयमान। सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणामाभ्यम।
चराचरेश्सवरी त्वंहि महामोह: विनाशिन। मुक्ति मुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमननाम्यहम।

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