in

शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

यहाँ से आप जान सकते है की शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) के दिन देवी लक्ष्मी को कैसे प्रसन्न किया जाता है। शरद पूर्णिमा की व्रत कथा और शरद पूर्णिमा को किन किन नामों से जाना जाता है।

शरद पूर्णिमा को ‘कोजागर पूर्णिमा’ (Kojagara Purnima) और ‘रास पूर्णिमा’ (Raas Purnima) के नाम से भी जाना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन रखे जाने वाले व्रत को ‘कौमुदी व्रत’ (Kamudi Vrat) भी कहा जाता है।

शरद पूर्णिमा प्रारंभ शरद पूर्णिमा समाप्‍त
13 अक्‍टूबर 2019 को रात्रि 12:36 बजे 14 अक्‍टूबर 2019 रात्रि 02:38 बजे 

शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) का हिन्‍दू धर्म में विशेष महत्‍व है। मान्‍यता है कि शरद पूर्णिमा का व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्‍त होकर धरती पर अमृत की वर्षा करता है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, माता लक्ष्‍मी (Laxmi Puja) और विष्‍णु जी (Bhagvan Vishnu) की पूजा का विधान है। शरद पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर उसे रात भर चंद्रमा की रौशनी में रखा जाता है और फिर 12 बजे के बाद उसका प्रसाद गहण किया जाता है यह कहा जाता है इस खीर में अमृत मिल जाता है और यह बहुत से रोगों को दूर करने की शक्ति रखती है।

शरद पूर्णिम को ‘कोजागर पूर्णिमा’ कहा जाता है क्योकि इस दिन धन की देवी लक्ष्‍मी रात के समय आकाश में विचरण करते हुए कहती हैं कि ‘कौन जगा हुआ है?’ कहा जाता है कि जो भी व्‍यक्ति शरद पूर्णिमा के दिन रात में जगा होता है मां लक्ष्‍मी उन पर अपनी कृपा करती है।

शरद पूर्णिमा व्रत कथा

पौराणिक मान्‍यता के अनुसार एक साहुकार की दो बेटियां थीं। वैसे तो दोनों बेटियां पूर्णिमा का व्रत रखती थीं, लेकिन छोटी बेटी व्रत अधूरा करती थी। इसका परिणाम यह हुआ कि छोटी पुत्री की संतान पैदा होते ही मर जाती थी। उसने पंडितों से इसका कारण पूछा तो उन्‍होंने बताया – तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती थीं, जिसके कारण तुम्‍हारी संतानें पैदा होते ही मर जाती हैं। पूर्णिमा का व्रत विधिपूर्वक करने से तुम्‍हारी संतानें जीवित रह सकती हैं।

उसने पंडितों की सलाह पर पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक किया। बाद में उसे एक लड़का पैदा हुआ, जो कुछ दिनों बाद ही मर गया। उसने लड़के को एक पीढ़े पर लेटा कर ऊपर से कपड़ा ढक दिया। फिर बड़ी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पीढ़ा दे दिया। बड़ी बहन जब उस पर बैठने लगी तो उसका घाघरा बच्चे का छू गया. बच्चा घाघरा छूते ही रोने लगा। तब बड़ी बहन ने कहा,”तुम मुझे कलंक लगाना चाहती थी। मेरे बैठने से यह मर जाता ” तब छोटी बहन बोली, “यह तो पहले से मरा हुआ था। तेरे ही भाग्य से यह जीवित हो गया है। तेरे पुण्य से ही यह जीवित हुआ है।

शरद पूर्णिमा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

1. पौराणिक हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार, माता लक्ष्मी आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि यानी शरद पूर्णिमा को समुद्र मंथन से निकली थीं।

2. शरद पूर्णिमा की रात्रि में माता लक्ष्मी उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी का भ्रमण करती हैं क्योकि इस दिन चन्द्र देव भी अपनी चंद्रमा का प्रकाश सम्पूर्ण पृथ्वी पर बरसाते है और देवी भी श्वेत उज्जवल रात्रि का आनंद लेती हैं।

3. शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा या कोजागरी पूनम भी कहते हैं। इसे बंगाल में कोजागरी लक्ष्मी पूजा भी कहते हैं। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

4. आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को कौमुदी व्रत होता है, इसे कोजागरी व्रत भी कहा जाता है। माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के दौरान पूछती हैं कि कौन जाग रहा है? जो जागता है, वो उसके घर जाती हैं।

5. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र कुमार कार्तिकेय का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन ही हुआ था। इस वजह से शरद पूर्णिमा को कुमार पूर्णिमा भी कहा जाता है।

6. रास पूर्णिमा- कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा के दिन ही गोपियों संग महारास रचाया था, इस कारण से शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

क्यों रखा जाता है पापांकुशा एकादशी का व्रत

navgrah

ग्रहो क़ो शांत करने के उपाए: