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शिवरात्रि पर सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए ऐसे करें पूजा और व्रत

महाशिवरात्रि का व्रत भगवान भोले नाथ के सभी भक्‍तों के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण होता है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ का भव्य रूप से शृंगार किया जाता है। सभी तीर्थ स्थलों और मंदिरों में भगवान शिव के शिवलिंग स्वरूप को समस्त वस्तुओं से सजाया जाता है। इस दिन शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा होती है। बहुत से भक्त इस दिन कांवड़ में गंगा जल लाकर भगवान शिव को स्नान कराते हैं और चार पहर की विशेष का भाग बनते है।

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भगवान भोले नाथ बड़े ही भोले माने जाते हैं, वे अपने भक्‍तों की भक्ति से बड़ी जल्‍दी प्रसन्‍न हो जाते हैं। महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ का अंश प्रत्येक शिवलिंग में पूरे दिन और रात मौजूद रहता है। उनकी कृपा से व्यक्ति के जीवन का उद्धार हो जाता है।

शिवरात्रि के अवसर पर शिवजी का सच्‍चे मन से व्रत एवं पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि की रात में देवी पार्वती और भगवान भोलेनाथ का विवाह हुआ था इसलिए यह शिवरात्रि वर्ष भर की शिवरात्रि से उत्तम है।  इस दिन शिव जी की उपासना और पूजा करने से शिव जी जल्दी प्रसन्न होते हैं।

रुद्राक्ष पहनने से भगवान शिव होते है जल्दी प्रसन्न

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शिवरात्रि की पूरी रात मंदिर में शिवभक्‍त भजन-कीर्तन करते हैं। कई मंदिरों में शिव-पार्वती के विवाह का भी आयोजन किया जाता है। महाशिवरात्रि से एक दिन पूर्व ही शिवनगरी में विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले सा नजारा देखने को मिलता है। काशी नगरी के इस पवित्र स्‍थान में देश-विदेश से श्रद्धालु भोले बाबा की कृपा पाने के लिए आते हैं।

शिवरात्रि पर सभी मंदिरों में हवन और अनुष्ठानों किये जाते हैं। इस दिन कुंवारी कन्याओं व्रत कर के भगवान शिव से अच्‍छे वर की कामना करती हैं। पुराणों में उल्‍लेख है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव से विवाह करने के लिए इसी दिन तपस्‍या की थी। जिसके फलस्‍वरूप जो भी कुंवारी कन्‍या महाशिवरात्रि का व्रत रखती है उसे शिवशक्ति के आशीर्वाद से उत्‍तम वर की प्राप्ति होती है।

शिवरात्रि की पूजा विधि

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शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराकर “ऊं नमो नम: शिवाय” मंत्र से पूजा करनी चाहिए। इसके बाद रात्रि के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा कर अगले दिन प्रात: काल ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए।

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भगवान शिव के फलदायी मंत्र

  1. भगवान शिव को पंचामृत से अभिषेक कराते हुए ‘ऊं ऐं ह्रीं शिव गौरीमव ह्रीं ऐं ऊं’ मंत्र का जाप करें।
  2. स्त्रियां सुख-सौभाग्‍य के फल हेतु ‘ऊं ह्रीं नमः शिवाय ह्रीं ऊं’ मंत्र का उच्‍चारण करें।
  3. लक्ष्मी की प्राप्ति हेतु ‘ऊं श्रीं ऐं ऊं’ मंत्र माला का जाप करें।
  4. विवाह में आ रही रूकावटों को दूर करने के लिए शिवशक्‍ति के मंत्र ‘हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी कान्तकांता सुदुर्लभाम’ का जाप करें।
  5. संपूर्ण पारिवारिक सुख-सौभाग्य हेतु ‘ऊं साम्ब सदा शिवाय नमः’ मंत्र का उच्‍चारण करें।

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