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शिवलिंग का रहस्य

Shivling Ka Rahasya

बहुत से लोगों ने शिवलिंग का गलत अर्थ बताकर शिवलिंग के बारे में गलतफहमियां पैदा की हुई है। जिसका अर्थ इतना गलत बताया गया है कि उसकी व्याख्या करना भी एक तरह का पाप है। इस में अंग्रेजों के साथ साथ हमारे देश के कुछ लोग भी शामिल हैं। यह सरासर महादेव का अपमान है। लेकिन हम आपको शिवलिंग के वास्तविक अर्थ के बारे में बताने जा रहे हैं और इसी के साथ-साथ आपको इसकी विशेषता भी पता चल जाएगी।

shivling pooja
Image: kamiyasindoor.com

शिवलिंग का अर्थ

शिवलिंग संस्कृत से निकला हुआ एक शब्द है। संस्कृत में लिंग का अर्थ है – प्रतीक यानी की शिवलिंग का अर्थ हुआ शिव का प्रतीक यानी कि एक ऐसा प्रतीक जिसे हम साक्षात शिव मानकर उसकी पूजा कर सकते हैं। संस्कृत भाषा में इसी प्रकार से पुलिंग का अर्थ होता है पुरुष का प्रतीक और स्त्रीलिंग का अर्थ होता है स्त्री का प्रतीक। बस इसी प्रकार से शिवलिंग का अर्थ है शिव का प्रतीक।

क्या है शिवलिंग

शिवलिंग एक ऐसा ढांचा है जिसे एक विशेष मकसद से बनाया जाता है। भारत भर में भगवान शिव के प्रतीक शिवलिंग को विभिन्न आकारों में दर्शाया गया है। लोगों द्वारा अपनी भावनाओं और भक्ति को प्रकट करने के लिए अपनी इच्छा अनुसार जिसका जैसा मन किया शिवलिंग को वैसा ही रूप दे दिया गया। लेकिन अगर प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंग को देखा जाए तो उन सभी का रूप एक दूसरे से काफी भिन्न है। हर शिव लिंग के रूप की पूजा का मकसद अलग अलग है। कुछ शिवलिंग अच्छे स्वास्थ्य के लिए बनाए गए हैं तो कुछ विवाह के लिए व कुछ शिवलिंग ध्यान साधना के लिए निर्मित किए गए हैं। लेकिन इन सभी में एक चीज सामान्य है। इन सभी की आकृति वृत्ताकार है जो कि तीनों लोको को दर्शाता है।

shivling

शिवलिंग इस बात का प्रतीक भी है कि भगवान शिव किसी स्त्री और पुरुष का प्रतीक ना होकर संपूर्ण ब्रह्मांड का शून्य का यानी कि निराकार का प्रतीक है। अर्थात उन्हें किसी एक शैली में बांधकर नहीं रखा जा सकता अगर आप विज्ञानिको द्वारा ली गई ब्रह्मांड की तस्वीर को देखेंगे तो आपको पता चलेगा की संपूर्ण ब्रह्मांड एक शिवलिंग की संरचना को दर्शाता है। शिवलिंग अनंत है यानी कि ना तो इसकी कोई शुरुआत है और ना ही इसका कोई अंत है।

शिवलिंग का निर्माण

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बहुत से शिवलिंगो को प्राचीन ज्ञान शस्त्रों में दिए गए निर्देशों के अनुसार बनाया गया है। इसी प्रकार से एक शिवलिंग अध्यात्मिक गुरु श्री सद्गुरु जी द्वारा भी बनाया गया है। जिसका नाम ध्यान लिंगम रखा गया है सद्गुरु का कहना है कि यदि कोई मनुष्य इस लिंगम के मात्र आस पास बैठा रहे तो कुछ ही देर में वह स्वयं ही ध्यान की मुद्रा में चला जाएगा।

समस्त ब्रह्मांड में केवल दो ही चीजें हैं ऊर्जा और पदार्थ। हमारा शरीर पदार्थ से निर्मित है वही हमारी आत्मा ऊर्जा है। ठीक इसी प्रकार से यह प्रकृति पदार्थ है और शिव पूजा ऊर्जा है और इन दोनों के मेल से निर्मित है शिवलिंग। वास्तव में हमारा शिवलिंग समस्त ब्रह्मांड की आकृति को दर्शाता है। आसान भाषा में समझाने के लिए कहा जाए तो शिवलिंग शिव का प्रतीक है और समस्त ब्रह्मांड के आकार के जैसे एक पत्थर का लिंग बनाकर हम उसकी पूजा करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस शिवलिंग में पूरे ब्रह्मांड की उर्जा समाने की शक्ति होती है। जब हम उस शिवलिंग की पूजा करते हैं तो उस ऊर्जा से हमारा कल्याण होता है।

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