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शिव पुराण में शिवलिंग की आधी परिक्रमा का सुझाव क्यों दिया गया है?

Shivling ki adhi parikrma kyu ki jaati hai?

हिंदू धर्म के अनुसार ‘त्रिमुर्ती’ में तीन मुख्य देवताओं, ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर को शामिल किया गया हैं। महेश्वर भगवान शिव का दूसरा नाम है। शिव ही ब्रह्मांड के निर्माता और मोक्ष के स्वामी है। भक्तों द्वारा इन्हे महादेव और भोलेनाथ के नाम से भी संबोधित किया जाता है।

शिव अनादी (जिसकी कही से शुरुआत नहीं होती) और अनंत (जिसका कोई अंत नहीं होता) है, वह शुन्या (शून्य) और एकया (एक) है। शिव ही जीवन और मर्त्यु का पूरा ज्ञान है। वह उदार, दयालु और शुभकामना का प्रतीक है। वह एकमात्र हिन्दू देवता है, जिसने श्रवण के पूरे महीने को समर्पित किया गया है।

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शिवलिंग को शिव का प्रतीकात्मक चित्रण मन जाता है। भक्त शिवलिंग पर दूध, शहद, बिल्व पत्तियां, जल और भांग अर्पित करते हैं और शिवलिंग के चारों ओर घूमते हैं।

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हमें शिवलिंग की अर्ध-परिक्रमा क्यों करना चाहिए

यद्यपि शिवलिंग के पूर्ण परिक्रमा करने वाले बहुत से लोग हैं। लेकिन शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग की केवल आधी-परिक्रमा की जानी चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि शिव अनादी और अनंत हैं। उनके पास अत्यधिक ऊर्जा है और ऊर्जा या शक्ति सदैव निर्मलता (दूध और पानी के रूप में) से बहती रहती है।

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ऐसा कहा जाता है कि शिव की शक्ति इतनी भयंकर है कि कोई भी इस मार्ग में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। जो भी ऐसा करता है उसे भगवान शिव के क्रोध का सामना करना पड़ता है। एक पुरानी कथा के अनुसार, एक बार राजा गंधर्व जो शिव भक्त थे, परिक्रमा के दौरान शिवलिंग पर ‘अभिषेक’ करते समय शिवलिंग से निकलने वाली शक्ति(धारा) के मार्ग में आ गए थे। इसके परिणामस्वरूप उनको अपनी सारी शक्ति और बुद्धि को खोना पड़ा था।

शिवलिंग का जल निकास मार्ग शिवलिंग का एक पवित्र हिस्सा है और कभी भी इसके पार कदम उठाना नहीं चाहिए। इसलिए, यहसलाह दी जाती है कि निकास मार्ग पर कदम उठाने से बचने के लिए केवल शिवलिंग की आधी-परिक्रमा को ही किया जाए।

शिवलिंग के पूजन से जुड़ी कुछ बातें

कहा जाता है की सावन के महीने में शिवलिंग की पूजा करने से घर खुशाल होता है और सुख व सम्पति में वृद्धि होती है। शिव अपने भक्तो की मनोकामना को पूर्ण करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। वह अपने भक्तो की भूल को भी बड़ी आसानी से माफ़ कर देते है। तभी तो उन्हें भोले नाथ के नाम से भी जाना जाता है।

शिवलिंग पर अभ‍िषेक

भगवान् शिव को अभ‍िषेक की क्रिया बहुत हे प्रिय है। समुन्द्र मंथन के दौरान जब देवो के हिस्से में विष आया, तो भगवान् शिव ने समस्त संसार को नष्ट होने से बचाने के लिए संव्य उस विश को ग्रहण कर लिया। जिसके बाद वह नीलकण्ठ नाम से जाने गए। परन्तु विश ग्रहण करने के कारण उनके शरीर का दाह बढ़ गया। उस दाह को शांत करने के लिए ही आज भी शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है। इसी लिए शिव को अभ‍िषेक बहुत ही प्रिये है। जो भी भक्त शिवलिंग का विविध पदार्थों से अभिषेक करता है भगवान् शिव उसकी मनोकामना को पूर्ण करते है।

  • कहा जाता है की शिवलिंग की विधि पूर्वक पूजा करने से मनुष्य – ज्ञान, सद्बुद्ध‍ि,संतान, धन, धन्य, विद्या, दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति करता है।
  • जिस स्थान पर शिवलिंग की पूजा की जाती है वह तीर्थ स्थान न होते हुए भी तीर्थ बन जाता है।
  • किसी तीर्थ स्थान पर बालू, मिटटी या भसम का शिवलिंग बना कर उसकी पूजा करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
  • शिवलिंग पर कभी भी मेहंदी या हल्दी नहीं चांदनी चाहिए।
  • शिवलिंग पर तांबे के बर्तन से दूध चढ़ाना पाप मन जाता है क्युकी दूध जहर बन जाता है।
  • किसी भी देवी देवता की खंडित मूर्ति की पूजा नहीं की जाती, लेकिन खंडित शिवलिंग की पूजा की जा सकती है।

 

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