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सावन के सोमवार का महत्व और कथा

SAWAN SOMVAR MAHATAV VA KATHA 

28 जुलाई 2018 से सावन शुरू होने जा रहा है। इस बार सावन पर ऐसा संयोग बन रहा है। जोकी दशकों में सिर्फ एक ही बार बनता है।

खास बातें

– सावन का पहला सोमवार 30 जुलाई को है।
– 26 अगस्त को श्रावण मास का आखिरी दिन व रक्क्षा बंधन होगा।
– 11 अगस्त को हरियाली अमावस्या है।
– 13 अगस्त को हरियाली तीज होगी।
– 15 अगस्त को नागपंचमी है।

हमारे धर्म में सावन के महीने को एक विशेष स्थान दिया गया है। यह माह भगवान शिव को बहुत प्रिय है, इसीलिए इस महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।

shivling pooja
Image: kamiyasindoor.com

कहा जाता है कि जो भी सावन के महीने में सच्चे मन से भगवान शिव का व्रत रखता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। यदि किसी को विवाह संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है तो सावन में सोमवार का व्रत करने से मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

सावन / श्रावण महत्व व हिंदी कथा

Somwar Sawan Katha In Hindi

क्या है सावन से जुड़ी कथा? (Sawan Se Judi Katha)

maha shivratri

सावन का महीना वर्षा ऋतु में शुरू होता है। इस महीने में बहुत से विशेष त्यौहार मनाए जाते हैं। यह महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। धार्मिक कथाओं के अनुसार जब माता सती ने अपने प्राणों को त्याग दिया था, तो बहुत वर्षो के पश्चात माता ने पार्वती के रूप में पुनः जन्म लिया था।

भगवान शिव को पति के रुप में पुनः पाने के लिए माता पार्वती ने सावन के पूरे माह कठोर तप किया। इसके पश्चात भगवान शिव ने खुश होकर माता पार्वती की मनोकामना पूर्ण की और माता पार्वती के साथ विवाह रचाया। जिसे हर वर्ष शिवरात्रि के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। यही कारण है की भगवान शिव को यह माह अत्यंत प्रिय है।

इसी माह जब भगवान शिव धरती पर अपनी ससुराल में गए थे, तो वहां उनका अभिषेक कर स्वागत किया गया था। इसीलिए इस महीने अभिषेक का बहुत महत्व बताया जाता है।

इससे जुड़ी अन्य मान्यता यह भी है कि सावन मास में ही समुंद्र मंथन हुआ था। जिस से निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण कर समस्त संसार को विनाश से बचाया था। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवताओं ने उन पर जल डाला था, इसीलिए अभिषेक में जल का भी बहुत महत्व है।

वर्षा ऋतु के समय ही भगवान विष्णु योगनिंद्रा में चले जाते हैं और इस समय पूरी सृष्टि भगवान शिव के अधीन हो जाती है। यदि कोई 16 सोमवार के व्रत रखने का इच्छुक है तो सावन के महीने से व्रत का आरंभ करना अत्यंत महत्वपूर्ण व लाभदाई माना जाता है।

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सावन में सोमवार के व्रत के महत्व (Sawan Mei Somwar ke Vrat Ka Mahtav)

सोमवार का दिन पूर्णता भगवान शिव को समर्पित है। इसीलिए सोमवार का भगवान शिव के भक्तों के लिए महत्व बढ़ जाता है। सावन के माह में चार से पांच सोमवार आते हैं। इस समय व्रत रखने वाले भक्तों को सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।

भगवान शिव को क्यों चढ़ाया जाता है बेलपत्र (Bhagwaan Shiv ko Priye Bel Ptra)

भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का भी बहुत महत्व माना जाता है। कहा जाता है, कि एक डाकू जो कि अपने जीवन यापन के लिए राहगीरों को लूटता था। एक रात वह पेड़ पर बैठा अपने शिकार का इंतजार कर रहा था। समय बीतता गया और वहां कोई नहीं आया।

जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था उसके मन में पश्चाताप का भाव बढ़ने लगा, वह खुद से निराश होने लगा और पेड़ के पत्तों को तोड़कर नीचे फेंकने लगा। वह बेलपत्र का पेड़ था। जिसके पत्र सीधे नीचे स्थापित शिवलिंग पर गिर रहे थे। मन में उत्पन्न करुण भाव के कारण उसके अंदर सच्ची श्रद्धा का संचार हो रहा था।

इस से प्रसन होकर भगवान् शिव ने उसे दर्शन दिया और उसकी समस्त परेशानियों को समाप्त कर उसे सही राह दिखाई। तभी से भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का महत्व बढ़ जाता है।

पूजन विधि (Shiv Pooja Ki Vidhi)

Rudrabhishek

जो भक्त सोमवार का व्रत करना चाहते हैं। उन्हें सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा करनी चाहिए क्योंकि गणेश जी को यह वरदान प्राप्त है, की कोई भी शुभ काम आरम्भ करने से पहले उनका आव्हान अवश्य किया जायेगा। इसके पश्चात भगवान शिव का रुद्र अभिषेक किया जाना चाहिए। क्रमबद्ध तरीके से रुद्राभिषेक करने की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है।

– शीतल जल से शिवलिंग को सनान कराया जाता है। फिर क्रमश: दूध, दही, शहद, घी, शकर (जिन्हे मिलाकर मंचामृत भी कहा जाता है) के दुबारा बारी-बारी से शिवलिंग को सनान कराया जाता है। इसके पश्चात शिवलिंग को पुनः शीतल जल से सनान कराकर शुद्ध कर लिया जाता है

– सनान के पश्चात् शिवलिंग पर चंदन का लेप लगा कर जनेऊ अर्पित किया जाता है।

– शिवलिंग पर कभी भी सिंधुर या कुमकुम अर्पित नहीं किया जाना चाहिए। शिवलिंग पर अबीर अर्पित किया जा सकता है।

– इसके पश्चात् शिवलिंग पर फल, बेल पत्र, फूल, धतूरा व शमी पत्र चढ़ाया जाता है।

– पूरी विधि के समय ॐ नमः शिवाये मंत्र का जप किया जाना चाहिए।

– अंत में माता गोरी की पूजा की जाती है।

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सावन के माह में विशेष त्यौहार (Sawan ke Mah Mei Vishesh tyohaar)

1. हरियाली तीज (hariyali teej)

सावन में शुकल पक्ष की तरीत्या को तीज मनाई जाती है। इसमें कुवारी कन्या मनचाहा वर प्राप्ति हेतु व्रत रखती है, माता गोरी को श्रृंगार चढ़ाया जाता है। नव विवाहिता अपने घर आती है।

2. नाग पंचमी (nag panchami)

इसमें नाग देवता की पूजा की जाती है। यह शुकल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है।

3. रक्क्षा बंधन (raksha bandhan)

यह भाई-बहन का विशेष त्यौहार है जिसको पुरे भारत में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। राखी का त्यौहार श्रावण की पूर्णिमा पर मनाया जाता है।

4. श्रावणी मेला (shravani mela)

इस त्यौहार में नदियों के सनान का विशेष महत्व होता है। इसे झारखण्ड व उसके नजदीकी इलाको में मनाया जाता है।

5. कजरी तीज (kajari teej)

मध्ये प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ का विशेष त्यौहार है। इसे किसानो व महिलाओ दुबारा बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह त्यौहार शुकल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है।

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