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संतान प्रप्ति वाला श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत (Shravana Putrada Ekadashi) – Adhyatam

Shravana Putrada Ekadashi Vrat in Hindi

Shravana Putrada Ekadashi

श्रावण मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकदशी को पुत्रदा एकादशी (Shravana Putrada Ekadashi) कहते हैं। सावन के महीने में बहुत से खास त्यौहार आते है और उनमे से एक त्यौहार यह भी है और इस एकादशी का भी विशेष महत्व है। यह एकादशी अपने नाम के अनुरूप ही मनुष्य को संतान का सुख प्रदान करती है। इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से स्त्री और पुरुष दोनों के मन में संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी हो जाती है । यह व्रत मुख्य रूप से भगवान विष्णु की उपासना में किया जाता है ।

श्रावण पुत्रदा एकादशी कब है (Shravana Putrada Ekadashi Date)

श्रावण पुत्रदा एकादशी 22 अगस्त 2018 को है। एकादशी का शुभ समय 23 अगस्त 2018 सुबह 5 बजकर 58 मिनट से 8 बजकर 32 मिनट तक है ।

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा (Shravana Putrada Ekadashi Katha)

प्राचीन समय में माहिष्मती नाम के राज्य में महीजीत नाम का राजा राज्य करता था। राजा बहुत ही प्रतापी और दानी था और अपनी प्रजा के साथ एक समान व्यवहार करता था। परंतु उस राजा का कोई भी पुत्र नहीं था। इस कारण वह हर वक्त दुखी रहता था। उसका मानना यह था की जिस मनुष्य के पास संतान नहीं होती उसके लिए इस लोक और परलोक दोनों में ही दुःख पाता हैं। संतान सुख की प्राप्ति के लिए राजा ने बहुत से उपाय किए परंतु फिर भी पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई।

जब राजा की वृद्धावस्था हुई तब उसने अपने सभी मंत्रियों और सलाहकारों को बुलाया और उनके साथ अपने विचारों को साझा करने लगा कि मैंने न तो कभी किसी का अपमान किया है ना ही ब्राह्मणों को दुःख दिया है और अपनी प्रजा को अपने पुत्रों की तरह पाला है। परंतु फिर भी मैंने ऐसा कौन सा पाप किया है जिसकी वजह से मुझे संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है। राजा की ऐसी बातें सुनकर उसके मंत्री और प्रजा के कुछ लोग आसपास के वन में जाकर ऋषि मुनियों के दर्शन के लिए गए तभी उन्होंने एक आश्रम मैं अत्यंत तपस्वी ऋषि को देखा

उस ऋषि का नाम था लोमेश मुनि। उनकी ख्याति सारे ब्रह्मांड में थी । लोमेश मुनि ने उन सबको अपनी ओर आते देखकर अपने तरफ आने का कारण पूछा और बोले कि हम मुनियों का जन्म तो लोक कल्याण के लिए ही हुआ है। आपकी जो भी परेशानी है वह आप मुझसे कहें तब सभी ने मुनि के सामने सारी बातें कह डाली और यह भी बताया की राजा की कोई संतान ना होने की वजह से वो भी दुखी रहते हैं और उनके दुख की वजह से हमें भी दुख का अनुभव होता है।

आप से हमारी यही विनती है कि आप हमें राजा के पुत्र होने का उपाय बतलाएं। सारी बातें सुनकर ऋषि ने अपने नेत्रों को बंद किया और राजा के पूर्व जन्म के बारे में ध्यान करने के बाद बताया कि यह राजा अपने पुराने जन्म में किये पाप की वजह से हुआ है राजा पूर्व जन्म में एक निर्धन वैश्य था और निर्धन होने की वजह से इसने कई गलत काम किए हैं। यह एक  गांव से दूसरे गांव में व्यापार करने के लिए जाया करता था।

एक समय जेष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन जब यह किसी दूसरे गांव में जा रहा था और कुछ दिनों से भूखा प्यासा था तो एक जलाशय के पास जल पीने के लिए रूक गया तभी उसी स्थान पर एक ब्याही हुई प्यासी गाय जल पी रही थी। राजा ने उस प्यासी गाय को जल पीते हुए हटा दिया और स्वयं जल पीने लगा।  इसीलिए राजा को यह सब दुख सहना पड़ रहा है एकादशी के दिन उसने प्यासी गाय को जल पीते हुए हटाने के कारण उसको पुत्र का वियोग सहना पड़ रहा है

ऐसा सुनकर सभी लोग ऋषि से कहने लगे की शास्त्रों में हर किसी पाप का प्रायश्चित लिखा हुआ है तो आप हमें वो उपाय बताये जिससे राजा का यह पापा नष्ट हो जाए। लोमेश मुनि कहने लगे श्रावण शुक्ल पक्ष एकादशी को जिसे पुत्रदा एकादशी (Shravana Putrada Ekadashi) भी कहते हैं को तुम सब लोग व्रत करो और रात्रि में भगवान विष्णु का जागरण करो।  इससे राजा का पूर्व जन्म में किया गया पाप नष्ट हो जाएगा और साथ ही राजा को पुत्र की प्राप्ति हो जाएगी।

श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी आने पर सभी ने मिलकर पुत्रदा एकादशी (Shravana Putrada Ekadashi) का व्रत रखा और भगवान विष्णु का भजन कीर्तन किया। इस कथा को पढ़ने से और सुनने से सभी मनुष्य के सब पापों से मुक्त हो जाता है और इस लोक में संतान सुख भोग कर परलोक में स्वर्ग को जाता है

बोलो श्री सत्यनारायण भगवान की जय