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श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व और पूजा विधि

कृष्ण-जन्माष्टमी

हिंदू धर्म में भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन को बहुत ही श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण श्री हरी विष्णु जी के ही अवतार हैं भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था और वही गीता का उपदेश आज भगवत गीता के रूप में सभी मनुष्यों का मागदर्शन करता है भगवत गीता को पढने से मनुष्य के जीवन की सभी कठिनाइयाँ दूर हो जाती है

भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन को जन्माष्टमी के रुप में मनाया जाता है और भगवान श्री कृष्ण को आराध्य मानने वाले मनुष्य बड़े हर्ष उल्लास के साथ उनके जन्मदिन को मनाते हैं इस दिन बहुत से लोग व्रत आदि भी रखते हैं भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि के समय हुआ था और यह समय पुराने ग्रंथों के अनुसार बहुत ही शुभ समय माना जाता है

भगवान श्री कृष्ण के शक्तिशाली मन्त्र

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कृष्ण जन्माष्टमी का शुभ समय

वर्ष 2018 में श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2 सितंबर दिन रविवार को मनाई जाएगी जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से 00:45 मिनट तक है और अष्टमी तिथि 2 सितंबर रविवार को रात्री 10 बजकर 45 मिनट  पर शुरु हो जाएगी और 3 सितंबर सोमवार के दिन सायं 7 बजकर 19 मिनट तक रहेगी

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कृष्ण जन्माष्टमी कैसे मनाये

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर अपने सभी कार्यो को समाप्त करने के बाद स्नान आदि करके पूजा और व्रत की शुरुआत करनी चाहिए और अष्टमी तिथि के समाप्त होने के बाद ही अपना व्रत को खोलना चाहिए भगवान श्री कृष्ण की पूजा में दूध, जल, फूल, धूप, अक्षत, नारियल और सुपारी आदि के साथ भगवन श्री कृष्ण की आराधना करनी चाहिये और जिस स्थान पर पूजा करें उस स्थान पर हो सके तो एक पालना या झूले पर भगवान श्री कृष्ण की बालगोपाल वाली प्रतिमा को स्थापित करें

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भगवान श्री कृष्ण का प्रिय भोग और प्रशाद

भगवान श्री कृष्ण को माखन सबसे अधिक प्रिय है इसलिए उनकी पूजा के प्रसाद में माखन, मिश्री, खीर और पंजीरी का भोग लगाना चाहिए भगवान कृष्ण को तुलसी के पत्र को इस दिन चडाने का विशेष महत्व है इसलिए कान्हा जी को पूजा के भोग में तुलसी का पत्र भी चढ़ाना चाहिए जो भी मनुष्य जन्माष्टमी का व्रत रखते है उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और जो इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ रखता है उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है

दही हांडी उत्सव

इस दिन दही हांडी फोड़ने का भी खास महत्व है भगवान श्री कृष्ण बाल्यकाल से ही बड़े नटखट थे माखन उन्हें बहुत प्रिय था जिसे वह मटकी से चुरा कर खाते थे भगवान कृष्ण के जन्मदिवस पर उनकी इसी लीला को उनके भगत बड़े भव्य तरीके से मानते है भारत देश में बहुत जगहों पर इस दिन मटकी फोड़ने का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।

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