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सिन्हा संक्रांति (Simha Sankranti) पर घी क्यों खाया जाता है – Adhyatam

SIMHA SANKRANTI 2018

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सिन्हा संक्रांति (Simha Sankranti) पर विशेष रूप से भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। इस दिन सभी भक्त सूर्य भगवान, भगवान विष्णु और भगवान नरसिम्हा स्वामी को नैवेद्य (Naivedhya) या भोग अर्पण करते है और अपनी सभी मनोकामनाओ की पूर्ति के लिए उनसे प्रार्थना करते है। सिन्हा संक्रांति के दिन भगवान के अभिषेक के लिए विशेष रूप से नारियल के जल का उपयोग किया जाता है इसलिए इसे नारिकेला अभिषेक भी कहा जाता है ।

यह त्यौहार केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के मंदिरों में मनाया जाता है।

सिन्हा संक्रांति (Simha Sankranti) कब की है और क्या खास होने वाला है इस दिन

सिन्हा संक्रांति (Simha Sankranti) वर्ष 2018 में 18 अगस्त को है। इस दिन से राहु ने कर्क राशि में तथा केतु ने मकर राशि में प्रवेश कर लेगा। वहीं भगवान सूर्य देव भी राशि परिवर्तन कर रहे है। सूर्य देव कर्क राशि से सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। भादो मास में जब सूर्यदेव अपनी राशि परिवर्तन करते हैं तो उस संक्रांति को सिंह संक्रांति कहते हैं।

SIMHA SAKRANTI
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इस संक्रांति में घी के सेवन का विशेष महत्व होता है। इस दिन सभी को अपने घर में बनने वाले खाद्य पदार्थ में घी का प्रयोग आवश्यक रूप से करना चाहिए। इसी वजह से सिंह संक्रांति को घी संक्रांति भी कहा जाता है। सिन्हा संक्रांति (Simha Sankranti) पर हो सके तो गाय के देसी घी का उपयोग करना चाहिये, क्योकि गाय का देसी घी स्मरण शक्ति बढ़ाता है बच्चों में बुद्धि, ऊर्जा, बलवीर्य का विकास करता है,

सिन्हा संक्रांति का महत्व (Simha Sankranti Mehtav)

सिन्हा संक्रांति का महत्व इसलिए अधिक होता है क्योकि इस दिन सूर्य ग्रह एक राशी से दूसरी राशी में प्रवेश करता है और इसका मनुष्य के जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। सिन्हा संक्रांति अन्य संक्रांति त्यौहारों से इसलिए अलग और श्रेष्ट मानी जाती है। सिन्हा संक्रांति पर मनुष्य भगवान सूर्य की पूजा, उपासना करके अपने जीवन में आये अंधेरे को दूर कर सकता है और अपने जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त कर सकता है।

जो भी भक्त इस दिन सूर्य भगवान, भगवान विष्णु और भगवान नरसिम्हा स्वामी को प्रसन्न कर लेता है उसके जीवन में सभी परेशानियों का अंत अपने आप हो जाता है।

भगवान सूर्य देव के कुछ मन्त्र जिनको करने से वे प्रसन्न होते है ।

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः

ॐ संध्या सहित सूर्याय नमः

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