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शिवयजुर्मन्त्र / महादेव मन्त्र – कर्पूरगौरं करुणावतारं – आरती मंत्र

Sivayajurmantra with Meaning:

शिवयजुर्मन्त्र, कर्पूरगौरं करुणावतारं के नाम से भी प्रसिद्ध है यह मन्त्र सबसे प्रसिद्ध मंत्रों में से एक है जिससे सभी हिन्दुओ ने कभी न कभी जरूर सुना ही होगा। यह भगवान शिव से संबंधित एक प्राचीन संस्कृत श्लोक और लोकप्रिय आरती है। जोकि हमें यजुर्वेद से मिला है, यजुर्वेद हिंदू धर्म के चार प्रमुख ग्रंथों में से एक है।

Sivayajurmantra

भगवान शिव, हिन्दुओ के तीनो प्रमुख देवताओ में से एक है जिन्हे शंकर, रुद्र, भोलेनाथ, नीलकंठ और महादेव के नाम से भी जाना जाता है। वह परम पूज्य हिंदू देवता है। हिंदू पद्धतियों और पुराणों के अनुसार उन्हें विनाशक या बदलाव लाने वाला भी कहा जाता है। शिव शब्द शुभ को दर्शाता है। भगवान शिव पापो और दुष्टो का विनाश करते है और संसार का कल्याण करते है। शिव को शंकर नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ है शुभकर्ता यानी की कल्याण करने वाला। शिव बुराई को नष्ट करने वाले है शिव कल्याणकारी है और साथ ही शिव त्याग की मूर्ति भी है।

शिवयजुर्मन्त्र – Sivayajurmantra (कर्पूरगौरं करुणावतारं)

शिव यजूर मंत्र (कर्पूरगौरं करुणावतारं) एक शक्तिशाली मंत्र है जो आमतौर पर आरती के समय के दौरान बोला जाता है। यह भगवान शिव को प्रसन करने के लिए सबसे लोकप्रिय हिंदू मंत्रों में से एक है। जोकि कुछ इस प्रकार से है –

कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि ॥

karpūragauraṁ karuṇāvatāraṁ
sansārsāram bhujagendrahāram ।
sadāvasantaṁ hṛdayāravinde
bhavaṁ bhavānīsahitaṁ namāmi ।।

भगवान शिव को समर्पित सभी मंत्रों में से शिवयजुर्मन्त्र सबसे शुद्ध मंत्र माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंत्र का जप करते हुए भक्त आध्यात्मिक रूप से परमानंद महसूस करते हैं क्योंकि यह मंत्र उच्चतम क्रम में शिव की महिमा का गुणगान करता है। आइए समझें कि इसका क्या अर्थ है।

कर्पूरगौरं करुणावतारं मंत्र का अर्थ – Karpur Gauram Karunavtaram Mantr

कर्पूरगौरं वह जो एक कपूर के रंग के सामान शुद्ध और गौर वर्ण वाले है।

करुणावतारं उनका व्यक्तित्व करुणा का है।

संसारसारं वह जो दुनिया/सृष्टि का सार है।

भुजगेंद्रहारम् जो सांप को माला के रूप में धारण करते हैं।

सदा वसतं हृदयाविन्दे – वे हमेशा कमल की तरह हृदय में रहते हैं। हृदय जो कमल की तरह शुद्ध है। कमल, हालांकि गंदे पानी में पैदा होता है, लेकिन फिर भी उसके चारों ओर का कीचड़ उसे छू भी नहीं पता है। इसी प्रकार, भगवान शिव सदा जीवों के हृदय में रहते हैं जिसपर सांसारिक बुराइओं का प्रभाव नहीं पड़ता।

भवंभावनी सहितं नमामि – देवी भवानी (शिव की पत्नी) के साथ, उनको मेरा नमन है।

मन्त्र का पूरा अर्थ है- जो कपूर की तरह शुद्ध और गौर वर्ण वाले हैं, वह करुणा के साक्षात् रूप है, वही इस संसार का सार है और भुजंगों का हार धारण करते हैं। वे भगवान शिव माता पार्वती सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करते है और उन्हें मेरा नमन है।

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