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स्वर्ग प्राप्ति वाला परमा एकादशी व्रत (Parama Ekadashi Vrat)

Parama Ekadashi or Purushottam Maas Ekadashi

 

PARMA EKADASI

श्री परमा एकादशी (Parama Ekadashi) लोंध मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है | इसे पुरुषोत्तम मास की एकादशी (Purushottam Maas Ekadashi) भी कहते है | जिस प्रकार संसार में दो पैरों वालों में ब्राह्मण, चार पैरों वालों में गौ माता तथा देवताओं में इन्द्र राजा श्रेष्ठ है | उसी प्रकार मासों में अधिक अर्थात लोंध का मांस उत्तम है | इस महीने में पंच रात्रि अत्यंत फल देने वाली है | इस महीने में पद्मिनी और परमा एकादशी श्रेष्ठ है | उनके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं | अतः दुर्बल मनुष्य को एक व्रत जरूर करना चाहिए जो मनुष्य अधिक मास स्नान तथा एकादशी व्रत नहीं करते उन्हें आत्महत्या का पाप लगता है | यह मनुष्य योनि बड़े पुण्यो से मिलती है इसीलिए मनुष्य को एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए |

Parama Ekadashi vrat

परमा एकादशी व्रत कथा

एक बार युधिष्ठिर जी ने श्री कृष्ण जी से इस व्रत के बारे में और इसको करने की विधि पूछी | तब श्री कृष्ण बोले हे राजन इस एकादशी का नाम परमा है | इसके व्रत से समस्त पाप समाप्त हो जाते है तथा यह व्रत इस लोक में सुख तथा परलोक में मुक्ति दिलाते हैं | इसका व्रत पूर्वक विधि से करना चाहिए और भगवान विष्णु की धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए | परमा एकादशी (Parama Ekadashi) व्रत कथा के बारे में अब में बताता हूँ |

कांपिल्य नगर में सुविधा नाम का एक ब्राह्मण रहता था | उसकी स्त्री अत्यंत पवित्र तथा पतिव्रता से रहती थी | वह किसी पूर्व जन्म के कारण अत्यंत दरिद्र थी | उसे भिक्षा मांगने पर भी भिक्षा नहीं मिलती थी | वह सदैव वस्त्रों से रहित होते हुए भी अपने पति की सेवा करती रहती थी | वह अतिथि को अन्न देकर स्वयं भूखी रह जाती थी और पति से भी कभी किसी वस्तु की मांग नहीं करती थी | जब सुविधा ने अपनी स्त्री को अत्यंत दुर्बल देखा तो वह बोला जब में धनवानों से धन मांगता हूं तो वह मुझे नहीं देते | गृहस्थी केवल धन से चलती है अब मैं क्या करूं इसलिए परदेस जाकर कुछ उद्योग करूं |  क्योंकि विद्वानों ने उद्योग की प्रशंसा की है | इस पर उसकी स्त्री बोली हे प्राणनाथ में आपकी आज्ञाकारी पत्नी हूँ पति अच्छा हो या बुरा हो जो कुछ भी कहे पत्नी को वही करना चाहिए |

Parama Ekadashi katha

मनुष्य को पूर्व जन्म के कर्मों का फल मिलता है | सुमेरु पर्वत पर रहते हुए भी मनुष्य को बिना भाग्य के स्वर्ण नहीं मिलता | पूर्व जन्म में जो मनुष्य विद्या और भूमि दान करते हैं उन्हें इस जन्म में विद्या और भूमि मिलती है | विधाता ने भाग्य में जो लिखा है वो टाले नहीं टलता | यदि कोई मनुष्य दान नहीं करता तो भगवान उसे केवल अन्न ही देते हैं | इसीलिए आपको इसी स्थान पर रहना चाहिए क्योंकि मैं आपके बिना नहीं रह सकती | बिना पति के संसार में माता, पिता, भाई, ससुर निंदा करते हैं इसीलिए प्राणनाथ आपको उसी स्थान पर रहना चाहिए |

एक समय एक ऋषि उनके घर आए उनको देखकर सुविधा सहित स्त्री ने प्रणाम किया और बोलें हम आज धन्य हैं | आज हमारा जीवन आपके दर्शन से सफल हुआ | उन्होंने उनको आसन तथा भोजन दिया भोजन देने के पश्चात पतिव्रता स्त्री ऋषि से बोलि मुनिवर आप मुझे दरिद्रता का नाश करने की विधि बतलाइए | मैंने अपने पति को प्रदेश में धन कमाने से जाने को रोका है | मेरे भाग्य से आप आ गए हैं मुझे पूर्ण निश्चय है कि अब मेरी दरिद्रता शीघ्र ही नष्ट होने वाली है | अतः आप हमारी दरिद्रता नष्ट करने के लिए किसी व्रत को बतलाइए |

Purushottam Maas Ekadashi

इस पर मुनि बोले कि मल मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी के  व्रत से समस्त पाप, दुख और दरिद्रता समाप्त हो जाते जो मनुष्य परमा एकादशी व्रत (Parama Ekadashi Vrat) को करता है वह धनवान हो जाता है | इस व्रत में नाच, गाना सहित रात्रि जागरण करना चाहिए | कुबेर को श्री महादेव जी ने इस व्रत को करने को कहा था इस व्रत के प्रभाव से सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र को पुत्र, स्त्री और राज्य प्राप्त हुआ था | उसको एकादशी की व्रत की विधि कह सुनाई | एकादशी के दिन प्रातः काल नित्य कर्म से निवृत्त होकर विधि पूर्वक आरंभ करना चाहिए जो मनुष्य करते हैं वो अपने समस्त परिवार सहित स्वर्ग लोक को जाते हैं | जो 5 दिन तक संध्या को भोजन करते हैं और जो मनुष्य स्नान करके 5 दिन तक ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं उन्हें समस्त संसार के भोजन कराने का फल मिलता है | इस व्रत में जो घोड़े दान करते हैं उन्हें तीनो लोक दान करने का फल मिलता है |

Vishnu Dev

जो मनुष्य उत्तम ब्राह्मण को तिल दान करते हैं वे तिल की संख्या के बराबर विष्णु लोक में रहते हैं | जो घी का पात्र दान करते हैं वह सूर्यलोक हो जाते हैं | ब्राम्हण मुनि के कहे अनुसार उन्होंने परमा एकादशी का 5 दिन तक व्रत किया | व्रत समाप्त होने पर उसने देखा कि उस राज्य के राजकुमार उसके सामने खड़े हैं राजकुमार ने एक उत्तम घर जो कि सब वस्तुओं से सजा हुआ था रहने के लिए उन्हें दिया | राजकुमार उसको 1 ग्राम देकर अपने महल को चले गए वह दोनों इस व्रत के प्रभाव से इस लोक में अनंत सुख भोग कर अंत में स्वर्ग लोक को गए |

श्री कृष्ण ने कहा हे राजन जो मनुष्य परमा एकादशी (Parama Ekadashi) का व्रत करता है उसे समस्त तीर्थों व् यज्ञ आदि का फल मिलता है | जो मनुष्य लोंध मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करते हैं वह स्वर्ग में जाकर इंद्र के समान सुखो को भोगते है |

क्यक्ति को दान पुण्य, व्रत आदि करते रहना चाहिये और अध्यात्म के मार्ग पर बढते रहना चाहिये अध्यात्म (Adhyatam) का केवल एक ही अर्थ है की क्यक्ति अपने अंदर के चेतन तत्व को जानना अर्थात अपने आप के बारे में जानना | केवल अध्यात्म के मार्ग पर चल कर ही क्यक्ति और जीवात्मा परमात्मा में लीन हो सकता है और अपने जीवन को धन्य बना सकता है |

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