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मानव शरीर में त्रिदोष वात, पित्त और कफ क्या है?

Tridosh Vat Pitt Kaph

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त्रिदोष यानी की वात, पित्त और कफ मानव शरीर के तीन दोष है जिनके असंतुलित हो जाने के कारण शरीर को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। प्राचीन हिंदू आयुर्वेद चिकित्सा में रोगों का उपचार जड़ से किया जाता है। जिसके अनुसार ऐसा माना जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति में तीन बायोलॉजिकल एनर्जी पाई जाती हैं। जो एक व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को नियंत्रित करती हैं। यदि इन एनर्जी यानी की ऊर्जा को संतुलित बनाया रखा जाए तो व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से सदैव स्वस्थ और मजबूत बना रहता है यह तीन शारीरिक ऊर्जा वात, पित्त और कफ नाम से जानी जाती है और यह शरीर को बनाने वाले पांच मूल तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के मेल से बनती है जीने पंचभूत भी कहा जाता है।

इन्हीं के आधार पर एक व्यक्ति का स्वभाव निर्धारित होता है। जन्म से तो यह सभी में संतुलित स्थिति में मौजूद होते हैं लेकिन समय के साथ कुछ में इनमें से एक दोष अपनी सामान्य मात्रा से या तो अधिक और या फिर कम हो जाता है। जो शरीर में रोग या कहे तो विकार उत्पन्न करने का कारण बनता है। व्यक्ति की जीवन शैली, पर्यावरण और उसके आहार के आधार पर यह दोष बदलते रहते हैं लेकिन यदि कोई इन्हें अपने जन्म के समय की स्थिति के करीब ले जाए तो वह पूर्णता मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ हो जाता है। आइए जानते हैं कि क्या है यह वात, पित्त और कफ !

 

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वात दोष – Vata

इस दोष का आधार वायु और आकाश है। यदि किसी मनुष्य में वायु तत्व सामान्य से ज्यादा हो जाता है तो वह वात दोष कहलाता है वात दोष का स्थान शरीर में बड़ी आंत, जांघ, हड्डियां, जोड़, कान त्वचा मस्तिष्क और तंत्रिका के ऊपर होता है। इस दोष से प्रभावित व्यक्ति खराब भूख, दुबला शरीर, गतिशील पाचन तंत्र, अच्छी नींद लेने में असमर्थ, मूड स्विंग और ठंड को सहन कर पाने में असमर्थ होता है। मुंह से लार टपकना, उकाई आना, थका हुआ महसूस करना, घबराहट, शरीर का कांपना और पेट में गुडगुड भी वात दोष के ही लक्षण है।

पित्त दोष – pitta

पित्त दोष का आधार अग्नि और जल है। यह शरीर की पाचन क्रिया और तापमान को नियंत्रित करता है। शरीर को गर्मी देने वाला तत्व ही प्रीत कहलाता है। इसी से शरीर को बल भी मिलता है। यह हमारे शरीर में जल के रूप में रहता है जिसका मुख्य स्थान हृदय से नाभि तक है। बेचैनी होना, शरीर में फोड़े होना, अधिक पसीना आना, अधिक भूख लगना, पेशाब में जलन, नाक से रक्त बहना, युवावस्था में बाल सफेद होना, नेत्र पीले रहना और दस्त लगना पित्त दोष के बिगड़ने के लक्षण है। इस से प्रभावित व्यक्ति के मुंह का स्वाद कड़वा रहता है तथा क्रोध अधिक आता है यह व्यक्ति सामान्य व्यक्ति की तुलना में गर्मी ज्यादा अनुभव करता है।

कफ दोष – kapha

इस दोष का आधार पृथ्वी और जल है। यह शरीर के विकास और जल के अवशोषण को नियंत्रित करता है यह हमारे शरीर में त्वचा को नमी जोड़ों को चिकना तथा इम्यूनिटी को बढ़ाने में सहायता करता है। शरीर में कफ दोष के असंतुलित होने से हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, जल्दी जल्दी जुकाम होना, शरीर का वजन बढ़ना, मुंह में मीठा स्वाद रहना, शरीर फूलने लगना, बेचैनी होना, शरीर में सूजन, खांसी के साथ कफ आना, गले में खराश तथा खुजली जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है। कफ दोष प्रमुख व्यक्ति को जल्दी गुस्सा नहीं आता है। उसका पाचन तंत्र धीमा होता है तथा वह अच्छी नींद लेने वाला होता है।

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