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उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) व्रत 2018 का महत्त्व एवं पूजा विधि

Utpanna Ekadashi Vrat 2018

उत्पन्ना एकादशी प्रारम्भ        2 दिसंबर 2018  को दोपहर 2 बजे
उत्पन्ना एकादशी समाप्त 3 दिसंबर 2018  को दोपहर 1 बजे
व्रत खोलने का समय 4 दिसंबर 2018  को सुबह 06:57 से 09:05
utpanna ekadashi
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उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष के दिन मनाई जाती हैं। इसी दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था।  इसी कारण इस दिन को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता हैं। इसी दिन स्वयं भगवान विष्णु ने माता एकादशी को आशीर्वाद दिया था और इस दिन को एक महान व्रत एवम पूजा का बताया था। एकादशी के व्रत का महत्व पुराणों में भी पढ़ा जा सकता है एकादशी के व्रत का फल एक समान एवम उत्तम होता हैं।

उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से सभी मनुष्यों के पहले और वर्तमान दोनों के पाप मिट जाते है। जो भक्तजन हर महीने आने वाली एकादशी का व्रत शुरु करना चाहते है, वे लोग उत्पन्ना एकादशी से ही अपने एकादशी के व्रत की शुरुआत कर सकते है।

उत्पन्ना एकादशी व्रत विधि एवम महत्व (Utpanna Ekadashi Vrat Vidhi Mahatv)

उत्पन्ना एकादशी का व्रत दशमी की रात्रि से प्रारंभ हो जाता हैं और जो द्वादशी के सूर्योदय तक चलता हैं। कुछ लोग दशमी के दिन ये व्रत प्राम्भ कर देते है और दशमी के दिन सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत रहते है।

इस दिन चावल, दाल किसी भी तरह का अन्न ग्रहण नहीं किया जाता और कथा सुनने एवम पढने का महत्व अधिक होता हैं। इस व्रत से अश्वमेघ यज्ञ का पुण्य मिलता हैं। उत्पन्ना एकादशी वाले दिन प्रातः जल्दी स्नान करके ब्रह्म मुहूर्त में भगवान कृष्ण का पूजन किया जाता हैं। इसके बाद विष्णु जी एवं एकादशी माता की आराधना की जाती है और उनको भोग लगाया जाता है।

दीप दान एवम अन्न दान का भी विशेष महत्व होता हैं। ब्राह्मणों, गरीबों और जरुरतमंद को दान देना अच्छा मानते है। लोग अपनी श्रद्धा अनुसार भोजन, पैसे, कपड़े या अन्य जरूरत का समान दान में देते है। इस दिन कई लोग निर्जला उपवास करते हैं और रात्रि में भजन गायन के साथ रतजगा किया जाता हैं। इस व्रत का फल कई यज्ञों के फल, एवम कई ब्राह्मण भोज के फल से भी अधिक माना जाता हैं।

सभी मनुष्य अपने रीती रिवाज के अनुसार एकादशी के व्रत का पालन करना चाहिए। कथा पढना एवम सुनने से मनुष्यों को विशेष फल की प्राप्ति होती है और पूण्य की प्राप्ति होती है।

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