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वरलक्ष्मी व्रत (VarLakshmi Vrat) 2018 पूजा विधि और कथा – Adhyatam

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सभी शादीशुदा जोड़ो के लिए वरलक्ष्मी व्रत को रखने का बहुत महत्व बताया जाता है और यह बहुत पवित्र व्रत भी माना जाता है। यह व्रत अष्टलक्ष्मी पूजन के बराबर फल देता है । वरलक्ष्मी माता महा लक्ष्मी का ही सवरूप है। वरलक्ष्मी (VarLakshmi) देवी का अवतार दूधिया महासागर से हुआ था और इस महासागर को ही क्षीर सागर भी कहते है ऐसा भी कहते है की भगवान विष्णु का वास भी क्षीर सागर में ही है। देवी वरलक्ष्मी अपने भगतों की धन और आश्वर्य से सम्बंधित सभी इच्छाओं को पूरा करती है और अपने भगतों को इच्छा अनुसार वरदान देती है।

इसलिए उनको ‘वर’ (Var) और ‘लक्ष्मी’ (Laxmi) दोनों कहा गया है। वरलक्ष्मी व्रत श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के दौरान आखिरी शुक्रवार को मनाया जाता है और राखी और श्रवण पूर्णिमा के कुछ दिन पहले आता है।

वरलक्ष्मी व्रत मुह्रत 2018 (VarLakshmi Vrat Muhrat)

वरलक्ष्मी व्रत पूजा 24 अगस्त 2018 को आने वाली है। वरलक्ष्मी व्रत पूजा का शुभ मुह्रत और लग्नो के नाम जिन पर इसका शुभ प्रभाव पड़ेगा वे है सिंह लग्न पूजा मुहूर्त 06:09 से 07:51 बजे तक, वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त दोपहर 12:16 से 14:32 तक, कुंभ लग्न पूजा मुहूर्त सायं 18:24 से 19:57 और वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त रात्री 23:07 से 25: 05 बजे तक है।

वरलक्ष्मी व्रत की कथा (VarLakshmi Vrat Katha)

इस व्रत की कथा को एक बार भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी । वरलक्ष्मी व्रत को करने से सभी स्त्रियों के पति का धन, आश्वर्य, सौभाग्य में बढोतरी होती है और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। 24 अगस्त 2018 को जिस दिन यह व्रत आ रहा है स्त्रियां इस दिन वर को प्रदान करने वाली वरलक्ष्मी देवी की आराधना करती है। यह व्रत श्रवण मास की पूर्णमासी से पहले आने वाले शुक्रवार के दिन रखा जाता है ।

एक बार मगध देश में कुण्डी नाम का नगर था । इस नगर का निर्माण स्वर्ण से हुआ था । इस नगर में एक स्त्री चारुमती रहती थी । जो कि अपने पति, सास और ससुर की सेवा करके एक आदर्श स्त्री का जीवन व्यतीत करती थी । माता महालक्ष्मी चारुमती से बहुत ही प्रसन्न रहती थी । एक रात को माता महालक्ष्मी ने उसको दर्शन दिया और वरलक्ष्मी व्रत रखने के लिए कहा ।

चारुमती ने स्वम तो व्रत रखा ही साथ ही उसने अपने आस पास रहने वाली सभी स्त्रियों को भी व्रत रखने के लिए कहा । श्रावण पूर्णमासी से पहले वाले शुक्रवार के दिन देवी लक्ष्मी द्वारा बताई गयी विधि से सबने वरलक्ष्मी व्रत को रखा । पूजन के पश्चात कलश की परिक्रमा करते ही उन सभी के शरीर विभिन्न स्वर्ण आभूषणों से सज गए । उनके घर भी स्वर्ण के बन गए तथा उनके घरो में भी आपार धन और स्वर्ण आ गये। उन सभी ने चारुमती की प्रशंसा करी क्यूंकि उसने सभी को व्रत रखने को कहा जिससे सभी को सुख समृद्धि की प्राप्ति हुई । उसके बाद सभी नगर वासियों ने भी इसी व्रत को किया जिससे सारे नगर में सब धनवान और समृध हो गये।

माता महालक्ष्मी के इस वरलक्ष्मी व्रत को रखने से और दुसरे मनुष्यों को बताने से और कथा आदि सुनने से माता महालक्ष्मी की कृपा होती है।

प्रेम से बोलो माता लक्ष्मी की जय

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