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विनायक चतुर्थी और गणेश चतुर्थी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि

Vinayak Chaturthi and Ganesha Chaturthi Vrat Puja Vidhi In Hindi

vinayak chaturthi 2019 dates

हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार हर माह में दो चतुर्थी तिथी होती है और चतुर्थी तिथियों का संबंध भगवान गणेश से  होता है विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष के दौरान आने वाली अमावस्या को मनाई जाती है और संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष के दौरान आने वाली पूर्णिमा को मनाई जाती है

इस तरह हर महीने विनायक चतुर्थी व्रत किया जा सकता है परन्तु जिस चतुर्थी का व्रत सबसे ज्यादा फल देने वाला होता है वह चतुर्थी भाद्रपद के महीने में होती है और इस महीने में आने वाली विनायक चतुर्थी गणेश चतुर्थी के रूप में मनाई जाती है

भगवान गणेश के जन्मदिवस पर गणेश चतुर्थी को पूरे भारत वर्ष में हिन्दुओं द्वारा एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है गणेश चतुर्थी का त्यौहार चातुर्मास में आता है इसमें दस दिनों तक भगवान गणेश जी की पूजा की जाती हैं गणेश चतुर्थी को महाराष्ट्र राज्य के लोग पुरे रीती रिवाज के साथ मानते है

विनायक गणेश चतुर्थी वर्ष 2019 की तिथियाँ और शुभ समय

तिथि   दिन पर्व पूजा का शुभ समय
10 जनवरी 2019 गुरुवार विनायक चतुर्थी 11:26 से 13:30
08 फरवरी 2019 शुक्रवार विनायक चतुर्थी 11:30 से 13:40
10 मार्च 2019 रविवार विनायक चतुर्थी 11:21 से 13:41
09 अप्रैल 2019 मंगलवार विनायक चतुर्थी 11:07 से 13:38
08 मई 2019 बुधवार विनायक चतुर्थी 10:58 से 13:37
06 जून 2019 गुरुवार विनायक चतुर्थी 10:57 से 13:42
06 जुलाई 2019 शनिवार विनायक चतुर्थी 11:03 से 13:09
04 अगस्त 2019 रविवार विनायक चतुर्थी 11:07 से 13:46
02 सितंबर 2019 सोमवार गणेश चतुर्थी 11:05 से 13:36
02 अक्टूबर 2019 बुधवार विनायक चतुर्थी 10:59 से 11:39
31 अक्टूबर 2019 गुरुवार विनायक चतुर्थी 10:58 से 13:10
30 नवंबर 2019 शनिवार विनायक चतुर्थी 11:07 से 13:11
30 दिसंबर 2019 सोमवार विनायक चतुर्थी 11:22 से 13:24

गणेश चतुर्थी व्रत का महत्व (Ganesh Chaturthi Vrat 2019)

गणेश चतुर्थी व्रत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता हैं क्यूंकि इस व्रत को सभी लोग एक त्यौहार के रूप में भी मनाते है इस त्यौहार में सभी लोग एक पंडाल लगा कर या भगवान गणेश जी को एक स्थान पर स्थापित करके फिर उनकी मिलकर अर्चना करते है और इसमें सभी बढ़ चढ़ कर हिस्सा भी लेते हैं ऐसे में गणेश उत्सव के बहाने सभी में एकता आती हैं

ganesh chaturthi 2019

गणेश चतुर्थी व्रत से जीवन में सुख एवं शांति आती हैं

गणेश चतुर्थी व्रत संतान प्राप्ति के लिए महिलायें द्वारा रखा जाता है

सभी शुभ कार्यों की पूर्ति के लिए भी गणेश चतुर्थी का व्रत किया जाता हैं

किसी भी पूजा के पूर्व गणेश जी का पूजन एवम आरती की जाती हैं तब ही कोई भी पूजा सफल मानी जाती हैं.

विनायक चतुर्थी व्रत का महत्व (Vinayak Chaturthi Vrat 2019)

विनायक चतुर्थी का व्रत प्रत्येक महीने की अमावस्या के दिन जो चतुर्थी आती है उसमे किया जाता है विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है वरद का अर्थ होता है – भगवान से अपनी इच्छा पूर्ति के लिए पूछना” जो भी मनुष्य इस व्रत को पुरे मन से करता है भगवान गणेश उसको ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद देते हैं बुद्धि और धैर्य जिसको भी प्राप्त हो जाए वह जीवन में प्रगति कर सकता है साथ ही उसकी सब इच्छाएं अपने आप ही पूरी होती जाती है

गणेश चतुर्थी और विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि

गणेश चतुर्थी और विनायक चतुर्थी व्रत में सर्वप्रथम पचांग में मुहूर्त देख कर भगवान गणेश जी की स्थापना की जाती हैं उसके लिए सबसे पहले ईशान कोण में रंगोली बनाई जाती है उसके उपर चौकी राखी जाती है और चोकी के उपर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाते हैं उस कपड़े पर केले के पत्ते को रख कर उस पर मूर्ति की स्थापना की जाती हैं और पूजा सामग्री के साथ एक पान पर सवा रूपये रखे जाते हैं एक लोटे पर रोली  का धागा बाँध कर उस पर नारियल को रख कर पुरे दस दिन तक रखा जाता है और दसवे दिन इस पर रखे नारियल को फोड़ कर प्रशाद के रूप में वितरण किया जाता है

ganesh vrat 2019

सबसे पहले कलश की पूजा की जाती हैं जिसमे जल, कुमकुम, चावल चढ़ा कर पुष्प अर्पित किये जाते हैं और फिर भगवान गणेश को जल चढ़ाकर वस्त्र आदि पहनाए जाते हैं और फिर कुमकुम एवम चावल चढ़ाकर पुष्प समर्पित किये जाते हैं भगवान गणेश को मुख्य रूप से दूर्वा चढ़ायी जाती हैं इसके बाद मोदक का भोग लगाया जाता हैं आरती के बाद सबमें प्रशाद वितरित किया जाता हैं

विनायक चतुर्थी और गणेश चतुर्थी के व्रत के लिए सूर्योदय और सूर्यास्त का समय बहुत महत्पूर्ण होता है इसलिए शुभ समय का ध्यान रखते हुए ही व्रत को सम्पूर्ण करना चाहिए भादो में पुरे दस दिनों तक गणपति के नाम की धूम रहती हैं और इन दिनों में सभी रुके हुए मांगलिक कार्य पुरे किये जाते हैं

गणेश जी सभी देवताओं में सबसे श्रेष्ठ माने जाते है इनकी पूजा से व्यक्ति बुद्धि बढती है क्योकि इनको बुद्धि का देवता कहा जाता हैं इनकी दो पत्नियाँ रिद्दी एवम सिद्धि हैं जो भी मनुष्य रोजाना भगवान गणपति जी के मैट्रन का उच्चारण करता है उसके सभी कार्य सपहल होते है और बुद्धि का विकास होता हैं

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