in

जाने क्यों की जाती हैं विश्वकर्मा भगवान की पूजा और पढ़े उनकी आरती

Vishwakarma Jayanti 2018

vishwakarma bhagvan
livehindustan.com

आज है विश्वकर्मा पूजा का दिन और भगवान विश्वकर्मा की पूजा और आरती से करें उन्हें प्रसन्न

भगवान विश्वकर्मा की पूजा के दिन को भी हिंदू धर्म में हर त्यौहार की तरह बड़े धूमधाम से मनाया जाता है विश्वकर्मा जयंती साल में सिर्फ एक ही बार मनाया जाने वाला त्यौहार है जो कि 17 सितंबर को मनाया जाता है आइए आपको बताते हैं विश्वकर्मा दिवस 27 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है

विश्वकर्मा जयंती से जुड़ी हिन्दू धर्म में बहुत सी मान्यताएं हैं प्राचीन धर्म ग्रंथों के अनुसार विश्वकर्मा भगवान का जन्मदिन अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हुआ था परंतु कुछ का यह भी मानना है कि भाद्रपद की अंतिम तिथि को विश्वकर्मा भगवान की पूजा करना शुभ होता है इसलिए विश्वकर्मा भगवान की पूजा को सूर्य के पारगमन के आधार पर किया जाता है जिसकी वजह से हर साल की 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती के रुप में मनाया जाता है

कौन है भगवान विश्वकर्मा

भगवान विश्वकर्मा को सभी वस्तुओं के निर्माण का देवता माना जाता है हिंदू धर्म के अनुसार प्राचीन काल में देवताओं के अस्त्र शस्त्र, महलों और अन्य सभी वस्तुओं को भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया था यह भी कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही सोने की लंका, इंद्र देवता का बज्र, भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान कृष्ण की द्वारिका नगरी और अन्य बहुत बहुमूल्य वस्तुओं को भी बनाया था इसी वजह से विश्वकर्मा जयंती के दिन लोग सभी मनुष्य अपने अपने कार्य किए जाने वाले वस्तुओं की पूजा करते है जिनसे उनका निर्वाह होता है

भगवान विश्वकर्मा ने दुनिया में सभी चीजों की उत्पत्ति की थी इसलिए उन्हें इसलिए उनकी जयंती के दिन सभी कारोबारी और व्यवसायी लोग विश्वकर्मा भगवान की पूजा करते हैं ताकि उनको कारोबार में तरक्की मिले और उनके काम में बढ़ोतरी हो भगवान विश्वकर्मा को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा और अर्चना करनी चाहिए

विश्वकर्मा जी की आरतीः

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा॥ ॐ जय…

आदि सृष्टि में विधि को श्रुति उपदेश दिया।

जीव मात्रा का जग में, ज्ञान विकास किया॥ ॐ जय…

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।

ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥ ॐ जय…

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।

संकट मोचन बनकर, दूर दुःख कीना॥ ॐ जय…

जब रथकार दंपति, तुम्हरी टेर करी।

सुनकर दीन प्रार्थना, विपत हरी सगरी॥ ॐ जय…

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।

त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप सजे॥ ॐ जय…

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।

मन दुविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे॥ ॐ जय…

“श्री विश्वकर्मा जी” की आरती, जो कोई नर गावे।

कहत गजानंद स्वामी, सुख संपति पावे॥ ॐ जय…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

happy-navratri-durga-puja-mata-wishes-images

नव दुर्गा नवरात्री पर्व कथा पूजन महत्व एवम कविता

kundali-milaan-vivah

विवाह से पहले कुंडली मिलान का महत्व